कुल पेज दृश्य

रविवार, 24 मार्च 2013

समर्पण :धूप का कहा

मेरे गुडियों के किस्सों में ,
एकएक नाम तुम्हारा भी है!
और मेरे सयानेपन का ,
ये पैगाम तुम्हारे लिए है !
---------- नानी के लिए !रेरेमेरे 

कोई टिप्पणी नहीं :

एक टिप्पणी भेजें